मुख्य पृष्ठ › देवता › सूर्य देव

सूर्य देव

सूर्य देव: रविवार की पूजा

आरोग्य और तेज के देवता

स्वामी ग्रहसूर्य
शुभ रंगनारंगी / लाल
भोग / चढ़ावागुड़, लाल फूल, जल (अर्घ्य)
मंत्रॐ सूर्याय नमः

रविवार को ही क्यों?

रविवार का नाम 'रवि' यानी सूर्य से बना है। मान्यता है कि इस दिन के स्वामी ग्रह सूर्य हैं, इसलिए यह दिन सूर्य देव की उपासना के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

इस दिन क्या करें

इस दिन क्या न करें

🚫 तुलसी का अपमान या अनादर न करें
यह लोक-मान्यता पर आधारित है।

सूर्य देव कौन हैं?

सूर्य देव को हिंदू परंपरा में प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है, क्योंकि वे रोज़ आसमान में दिखाई देते हैं। उन्हें प्रकाश, ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का स्रोत माना गया है। ऋग्वेद में सूर्य की स्तुति के कई मंत्र मिलते हैं, और गायत्री मंत्र भी सविता यानी सूर्य के तेज को समर्पित है।

मान्यता है कि सूर्य देव सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होते हैं और अरुण उनके सारथी हैं। सात घोड़ों को हफ़्ते के सात दिन या प्रकाश के सात रंगों का प्रतीक भी माना जाता है।

पौराणिक मान्यताएं

पुराणों के अनुसार सूर्य देव महर्षि कश्यप और अदिति के पुत्र हैं, इसीलिए उन्हें आदित्य भी कहा जाता है। उनकी पत्नी संज्ञा और छाया की कथाएं प्रसिद्ध हैं। मान्यता है कि शनि देव और यमराज उनकी संतान हैं।

रामायण में युद्ध से पहले महर्षि अगस्त्य ने श्रीराम को सूर्य की स्तुति आदित्य हृदय स्तोत्र का उपदेश दिया था। सूर्य की उपासना का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा है, जो बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। ओडिशा का कोणार्क और गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर देश के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर हैं।

रविवार से संबंध

रविवार का नाम रवि यानी सूर्य से आया है। ज्योतिष की परंपरा में सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, पिता, सम्मान और सरकारी कामकाज का कारक ग्रह माना जाता है। इसलिए रविवार को सूर्य उपासना के लिए सबसे अच्छा दिन समझा जाता है।

पूजा की सरल विधि

  1. सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें। लाल या नारंगी रंग शुभ माना जाता है।
  2. तांबे के लोटे में साफ़ जल लें और उसमें थोड़ा गुड़ और लाल फूल की पंखुड़ी डालें।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हों और धीरे-धीरे जल की धारा सूर्य को अर्पित करें। कई लोग धारा के बीच से सूर्य को देखते हैं।
  4. अर्घ्य देते समय मंत्र का जाप करें।
  5. अंत में तीन बार परिक्रमा की तरह घूमकर प्रणाम करें और परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें।

ध्यान रखें कि जल पैरों के नीचे न गिरे। इसके लिए किसी बर्तन में जल इकट्ठा कर लेना अच्छा रहता है, जिसे बाद में किसी पौधे में डाल दें।

मंत्र और जाप

रविवार का व्रत

रविवार का व्रत सूर्य देव की कृपा पाने के लिए रखा जाता है। परंपरा में इस दिन एक समय भोजन किया जाता है, भोजन में नमक नहीं लिया जाता और सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करते। गेहूं, गुड़ या दूध से बने सादे पकवान खाए जाते हैं। जिन्हें स्वास्थ्य की कोई समस्या हो, वे व्रत के नियम अपने डॉक्टर की सलाह से ही तय करें।

क्या करें, क्या न करें

दान

परंपरा के अनुसार रविवार को गेहूं, गुड़, तांबे का बर्तन, लाल वस्त्र या लाल मसूर का दान शुभ माना गया है। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार और श्रद्धा से करें, दिखावे के लिए नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सूर्य को जल कब देना चाहिए? सूर्योदय के कुछ समय बाद तक, जब धूप तेज़ न हो। इस साइट के पंचांग में अपने शहर का सूर्योदय देख सकते हैं।

अगर सुबह बादल हों तो? पूर्व दिशा की ओर मुख करके मन में सूर्य का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जा सकता है।

क्या रोज़ सूर्य को जल दे सकते हैं? हां, कई लोग इसे रोज़ की आदत बनाते हैं।

अन्य दिनों के देव

सोमवार · भगवान शिवमंगलवार · हनुमान जीबुधवार · श्री कृष्णगुरुवार · बृहस्पति देवशुक्रवार · माँ लक्ष्मीशनिवार · शनि देव

राशियां

मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीन

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपरा पर आधारित है।