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भगवान शिव: सोमवार की पूजा
महादेव, भोलेनाथ
सोमवार को ही क्यों?
सोमवार का अर्थ है 'सोम' यानी चंद्रमा का दिन। शिव जी अपने मस्तक पर चंद्रमा धारण करते हैं, इसलिए परंपरा में सोमवार शिव पूजा और सोमवार व्रत का दिन माना गया है।
इस दिन क्या करें
- शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएं
- ॐ नमः शिवाय का जाप करें
- सोमवार व्रत रखें या सादा भोजन करें
इस दिन क्या न करें
🚫 काले कपड़े न पहनें
यह लोक-मान्यता पर आधारित है।
भगवान शिव कौन हैं?
भगवान शिव को महादेव, भोलेनाथ, शंकर और नीलकंठ जैसे कई नामों से जाना जाता है। वे त्रिदेवों में संहार और परिवर्तन के देवता माने जाते हैं। उनका रूप सादगी का प्रतीक है: गले में सर्प, मस्तक पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा, हाथ में त्रिशूल और डमरू, और शरीर पर भस्म।
भक्तों में उनकी पहचान सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देव यानी आशुतोष की है, इसलिए उन्हें भोलेनाथ कहा जाता है।
पौराणिक मान्यताएं
समुद्र मंथन की कथा के अनुसार जब हलाहल विष निकला और सृष्टि पर संकट आया, तब शिव जी ने उसे अपने कंठ में धारण कर लिया। कंठ नीला पड़ने से वे नीलकंठ कहलाए। गंगा के अवतरण की कथा में उन्होंने गंगा को अपनी जटाओं में संभाला।
शिव और पार्वती का विवाह, गणेश और कार्तिकेय का जन्म तथा नंदी की कथाएं पुराणों में विस्तार से मिलती हैं। महाशिवरात्रि को शिव-पार्वती के विवाह की रात माना जाता है।
बारह ज्योतिर्लिंग
शिव भक्त जीवन में एक बार बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की इच्छा रखते हैं। ये हैं: सोमनाथ (गुजरात), मल्लिकार्जुन (आंध्र प्रदेश), महाकालेश्वर (उज्जैन), ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश), केदारनाथ (उत्तराखंड), भीमाशंकर (महाराष्ट्र), काशी विश्वनाथ (वाराणसी), त्र्यंबकेश्वर (नासिक), वैद्यनाथ (झारखंड), नागेश्वर (गुजरात), रामेश्वरम (तमिलनाडु) और घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र)।
सोमवार से संबंध
सोम का अर्थ चंद्रमा है और चंद्रमा शिव जी के मस्तक पर विराजते हैं। इसलिए सोमवार शिव उपासना का दिन माना गया। ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए सोमवार की पूजा को मन की शांति से भी जोड़ा जाता है।
पूजा की सरल विधि
- सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें। सफेद रंग शुभ माना जाता है।
- शिवलिंग पर पहले साफ़ जल चढ़ाएं, फिर चाहें तो कच्चा दूध अर्पित करें।
- बेलपत्र चढ़ाएं। तीन पत्तियों वाला साफ़ बेलपत्र लें और चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रखें।
- चंदन या भस्म का तिलक लगाएं और धूप-दीप जलाएं।
- मंत्र का जाप करें और अंत में प्रार्थना करें।
लोक-मान्यता में शिव पूजा में तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल नहीं चढ़ाए जाते। धतूरा और आक के फूल शिव जी को प्रिय माने गए हैं।
मंत्र और जाप
- ॐ नमः शिवाय: पंचाक्षर मंत्र, सबसे सरल और लोकप्रिय।
- महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ (ऋग्वेद का मंत्र)
- शिव चालीसा और रुद्राष्टकम का पाठ।
सोमवार का व्रत
सोमवार का व्रत दिनभर फलाहार या एक समय सादे भोजन के साथ रखा जाता है। शाम को शिव पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। कई श्रद्धालु सोलह सोमवार का व्रत रखते हैं। सावन के सोमवार का महत्व सबसे ज़्यादा माना जाता है। व्रत में अपनी सेहत का ध्यान रखें, पानी और ज़रूरी भोजन न छोड़ें।
क्या करें, क्या न करें
- करें: शिवलिंग पर जल चढ़ाएं, शांत मन से ॐ नमः शिवाय का जाप करें, ज़रूरतमंद को भोजन दें।
- न करें: लोक-मान्यता में इस दिन काले वस्त्र, क्रोध और किसी का अपमान शुभ नहीं माना जाता।
दान
सोमवार को चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र या सफेद मिठाई का दान परंपरा में शुभ बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या घर पर शिव पूजा हो सकती है? हां, घर के शिवलिंग या शिव चित्र के सामने जल, बेलपत्र और दीपक से श्रद्धा से पूजा की जा सकती है।
शिवलिंग की परिक्रमा कैसे करें? परंपरा में पूरी परिक्रमा नहीं की जाती, आधी परिक्रमा करके लौट आते हैं।
अन्य दिनों के देव
राशियां
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपरा पर आधारित है।