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माँ लक्ष्मी

माँ लक्ष्मी: शुक्रवार की पूजा

धन, सुख और समृद्धि की देवी

स्वामी ग्रहशुक्र
शुभ रंगगुलाबी / सफेद
भोग / चढ़ावाकमल का फूल, खीर, सफेद मिठाई
मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

शुक्रवार को ही क्यों?

शुक्रवार का स्वामी ग्रह शुक्र है, जो सुख, सुंदरता और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन माँ लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा की परंपरा है।

इस दिन क्या करें

इस दिन क्या न करें

🚫 सोना, चांदी या पैसे का दान न करें
यह लोक-मान्यता पर आधारित है।

माँ लक्ष्मी कौन हैं?

माँ लक्ष्मी धन, सुख, सौभाग्य और समृद्धि की देवी मानी जाती हैं। उन्हें भगवान विष्णु की पत्नी कहा गया है। कमल पर विराजमान, हाथ में कमल लिए और सोने के सिक्के बरसाती हुई उनकी छवि सबसे प्रसिद्ध है।

उनके साथ बने दो हाथी बरसात और उर्वरता का, और कमल पवित्रता का प्रतीक माने जाते हैं।

पौराणिक मान्यताएं

समुद्र मंथन में चौदह रत्न निकले थे और माँ लक्ष्मी भी उन्हीं में से प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान विष्णु को वर के रूप में चुना। धन, ऐश्वर्य, साहस और विद्या जैसे आठ रूपों में उन्हें अष्टलक्ष्मी कहा जाता है।

दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन की परंपरा सबसे बड़ी है। श्री सूक्त उनकी प्राचीन स्तुति है।

शुक्रवार से संबंध

शुक्रवार का स्वामी ग्रह शुक्र है, जो सुख, सुंदरता, कला और ऐश्वर्य का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन माँ लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा की परंपरा है।

पूजा की सरल विधि

  1. सुबह घर और पूजा स्थान की सफ़ाई करें। साफ़-सुथरे घर में लक्ष्मी का वास माना जाता है।
  2. शाम को लक्ष्मी जी की तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं।
  3. कमल या गुलाबी फूल, खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
  4. मंत्र जाप करें और परिवार के साथ आरती करें।
  5. दरवाज़े पर रंगोली या दीपक रखने की भी परंपरा है।

मंत्र और जाप

शुक्रवार का व्रत

कई घरों में शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखा जाता है। इसमें गुड़-चने का प्रसाद चढ़ाया जाता है और खट्टी चीज़ों से परहेज़ किया जाता है। व्रत के सारे नियम परिवार की परंपरा और अपनी सेहत के हिसाब से अपनाएं।

क्या करें, क्या न करें

दान

शुक्रवार को चावल, दही, मिश्री, सफेद वस्त्र या कन्याओं को मिठाई का दान शुभ माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लक्ष्मी पूजा का सबसे अच्छा समय? परंपरा में शाम का समय, सूर्यास्त के आसपास, शुभ माना जाता है।

क्या पूजा से धन आता है? परंपरा में पूजा श्रद्धा और संतोष के लिए की जाती है। धन के लिए मेहनत, बचत और समझदारी सबसे ज़रूरी हैं।

अन्य दिनों के देव

रविवार · सूर्य देवसोमवार · भगवान शिवमंगलवार · हनुमान जीबुधवार · श्री कृष्णगुरुवार · बृहस्पति देवशनिवार · शनि देव

राशियां

मेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीन

यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपरा पर आधारित है।